तेरी आखोंका यह काजल
तेरी आखोंका यह काजल
तेरी आखोंका यह काजल
मुझे लगता है जैसे मेरी गझल
मैं शायद तुमसे प्यार करता हूॅं
तू लगती हो मुझे, सपनोंका महल
मुझे लगता है जैसे मेरी गझल
मैं शायद तुमसे प्यार करता हूॅं
तू लगती हो मुझे, सपनोंका महल
मैं ढुंढता हूॅं तुमको सारी दुनिया में
मगर तूम मेरे दिल में मची हलचल
मगर तूम मेरे दिल में मची हलचल
तुमसे कोई पुराना रिश्ता हैं मेरा
जैसे रिमझिम सावन और वो बादल
जैसे रिमझिम सावन और वो बादल
तेरा ये हाथ मेरे हाथमें आ जाये
फिर कहीं न जाये तेरा ये आचल...
फिर कहीं न जाये तेरा ये आचल...
... देवीदास हरिश्चंद्र पाटील
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