हुनर

 हूनर

       
लिखना तो चाहता हूॅं मगर डर लगता हैं
इतना तो चाहता हूॅं मगर डर लगता हैं


हारता हूॅं इसलिये के जीत नहीं सकता
जितना तो चाहता हूॅं मगर डर लगता हैं


ये रात बीत जायेगी, चाॅंद निकल जायेगा 
सपना तो चाहता हूॅं मगर डर लगता हैं


तूम मिलो न मिलो, मिलनेकी आस तो हैं
 मिलना तो चाहता हूॅं मगर डर लगता हैं

बात रखनेका हूनर शायद नहीं हैं मुझमें
कहना तो चाहता हूॅं मगर डर लगता हैं

    #हुनर                     
  ... देवीदास हरिश्चंद्र पाटील


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