ये तेरा मुस्कुराना..

 ये तेरा मुस्कुराना..



ये तेरा मुस्कुराना कुछ कहता हैं 
ये नजरे चुराना कुछ कहता हैं ... 


ये तेरा आंखे झुकाकर भाग जाना
झिझकना, इतरांना कुछ कहता हैं 


सूरज तप्त होकर भी , दिन में
चांद का आना कुछ कहता हैं 


दिल में बातोंका समिंदर लेकर भी 
वो तेरा होठ सिलाना कुछ कहता हैं 


रास्ते में बाप को आगे रखना और 
मां के पिछे छिप जाना कुछ कहता हैं 



... देवीदास हरिश्चंद्र पाटील 

०४.०४.२०२५ सुबह ०७.१५

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